Über die fatwa

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2015-05-22
Frage

क़ब्र की सख्तियाँ मोमिन से उसकी गुनाहों को मिटा देती हैं

क्या मुसलमान क़ब्र के परीक्षण से लाभ उठाता है कि उसके गुनाहों को हल्का कर दिया जाता है या उसे मिटा दिया जाता है ॽ
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इस उम्मत पर अल्लाह तआला की एक अनुकम्पा यह भी है कि उसने हिसाब किताब से पूर्व उसके गुनाहों के लिए मिटाने वाली चीज़ें बना दी हैं, शैखुल इस्लाम (इब्ने तैमिय्या) रहिमहुल्लाह ने गुनाह मिटाने वाली दस चीज़ों का उल्लेख किया है, उन्हीं में से एक क़ब्र का अज़ाब (यातना) है। आप रहिमहुल्लाह ने फरमाया :

मोमिन को दुनिया, बर्ज़ख (मरने के बाद से लेकर परलोक के दिन पुनः जीवित होने के बीच की अवधि के बर्ज़ख़ कहा जाता है) और क़ियामत में जो पीड़ा और कष्ट पहुँचता है जो कि एक यातना है : तो इसके कारण अल्लाह तआला उसके गुनाहों को मिटा देता है, जैसाकि सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित है कि आप ने फरमाया : “मोमिन को जो भी कष्ट, थकावट, दुःख और पीड़ा पहुँचती है यहाँ तक कि उसे एक काँटा भी चुभता है तो अल्लाह तआला उसके कारण उसके गुनाहों को मिटा देता है।

“मजमूउल फतावा” (24/375)

तथा आप रहिमहुल्लाह ने फरमाया :

आठवाँ कारण : क़ब्र में जो परीक्षण, दबाव और घबराहट होती है, तो यह उन चीज़ों में से है जिसके द्वारा गुनाहों को मिटा दिया जाता है।

“मजमूउल फतावा” (7/500).

तथा शैखुल इस्लाम इब्ने तैमिय्या रहिमहुल्लाह ने मिनहाजुस्सुन्नह (6/238) में यह भी फरमाया है कि गुनाहों को मिटाने वाली चीज़ों में से : मोमिन का अपनी क़ब्र में दबाव और दोनों फरिश्तों के फित्ने से परीक्षण किया जाना भी है। और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

शैख मुहम्मद सालेह अल-मुनज्जिद