À propos de la fatwa

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2015-04-22
Question

क्या पति के लिए दूसरी पत्नी के घर पर उसकी सहमति के बिना कोई अन्य पत्नी लाना जाइज़ है ॽ

एक बार पहली पत्नी अपने घर में नहीं थी, तो पति पहली पत्नी से अनुमति लिए बिना दूसरी पत्नी को उसके घर में ले आया, जब वह वापस आई और उस से इस काम के बारे में पूछा, तो उसने यह कहते हुए जवाब दिया : यह मेरा घर है और मुझे इस बात का अधिकार है कि मैं जिसे चाहूँ लाऊँ। यदि तुम्हारे पास क़ुर्आन या हदीस से इसके खिलाफ कोई दलील है तो उसे पेश करो, तो इस मस्अले में सही बात क्या है ॽ

Réponse
Réponse

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

प्रत्यक्ष बात यह है कि पति के लिए ऐसा करने का अधिकार नहीं है, सिवाय इसके कि घर की मालिकिन इसकी अनुमति प्रदान कर दे और इस से खुश हो, क्योंकि यव बात सर्वज्ञात है कि आम तौर पर औरत के अंदर गैरत होती है और प्रति औरत की यह इच्छा होती है कि उसका घर उसके लिए ही विशिष्ट रहे।

तथा जिस रूप के बारे में प्रश्न किया गया है कि वह घर की मालिकिन की अनुपस्थिति में उसे दाखिल करता है, निषिद्धता और बढ़ जाती है ; क्योंकि यह पहली पत्नी के घर में उस से आनंद लेने के लिए संभावित है, और यह बात सर्वज्ञात है कि इससे उसे तकलीफ़ होती है।

शैख सुलैमान अल-माजिद -हफिज़हुल्लाह से प्रश्न किया गया :

क्या यह मेरा अधिकार है कि मेरा पति जब दूसरी पत्नी को हमारे घर बुलाए तो मेरी अनुमति ले ॽ जबकि यह बात ज्ञात रहे कि वह कहता है: मामले मेरे हाथ में है। अल्लाह तआला आप के ज्ञान से हमें लाभ पहुँचाये।

तो उन्हों ने उत्तर दिया :

यदि एक सौकन (सवत) को दूसरी सौकन से मिलने में आपत्ति हो तो पति के लिए जाइज़ नहीं है कि उसे इस चीज़ पर मजबूर करे, किंतु औरत के लिए अच्छा यही है कि अपनी सौकन के साथ संबंध को अच्छा रखे, और उसके साथ संपर्क को बाक़ी रखे यद्यपि वह संबंध की निम्न सीमा ही में क्यों न हो, क्योंकि उन दोनों के बीच संबंध विच्छेद आमतौर पर बच्चों के बीच संबंध विच्छेद का कारण बनता है, और बच्चों के बीच संबंध विच्छेद उनके दीन और दुनिया दोनों को प्रभावित करता है : रही बात दुनिया की तो वह भाईयों के अधिकार को नष्ट करके और उनके पास जो कुछ होता है उस से लाभान्वित न होने के रूप में प्रकट होती है, इसी प्रकार बर्कत चली जाती है और संबंध तोड़ने के कारण आयु कम हो जाती है।

रही बात आखिरत को प्रभावित करने की तो : वह कड़ी यातना है, इसलिए पत्नी को चाहिए कि वह दूर के भविष्य को देखे और इन अर्थों के कारण उस तंगी (संकीर्णता) को सहन करे जो वह अपनी सौकन के प्रति अनुभव करती है, और पति के उद्देश्य और मतलब को समझने की कोशिश करे, और वह उसके बच्चों के बीच घनिष्ठा स्थापित करना है, और यह आमतौर पर दोनों सौकनों के बीच न्यूनतम संबंध के द्वारा ही संभावित है।

तथा पति के लिए जाइज़ नहीं है कि वह अपनी पत्नी को ऐसी चीज़ पर बाध्य करे जिसके अंदर उसे तंगी और कठिनाई महसूस हो।

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।

शैख की साइट से समाप्त हुआ।

http://www.salmajed.com/node/11187

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।