Over de fatwa

:attribute moet een datum bevatten. :

2015-05-22
Vraag

शब्द 'अक़ीदा' का उद्धरण और उसका अभिप्राय

शब्द 'अक़ीदा' का क्या अर्थ है?
Antwoord
Antwoord

हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए योग्य है।

अक़ाईद उन बातों को कहा जाता जिनकी मन पुष्टि करते हैं, दिल उन से सन्तुष्ट होते हैं, और वो बातें उन के धारकों के निकट एक ऐसा विश्वास होती हैं जिन में किसी सन्देह का समावेश होता है और न ही किसी शक की कोई गुन्जाइश होती है।

अक़ीदा का शब्द अरबी भाषा में (अ-क़-दा) के तत्व से निकला (उद्धृत) है, जिस का अर्थ किसी चीज़ के निश्चित, सुदृढ़, पक्का और मज़बूत होने के होते हैं, चुनाँचि क़ुर्आन में इसी अर्थ में अल्लाह तआला का यह फरमान है : "अल्लाह तुम्हारे बेकार क़समों (के खाने) पर तो खैर पकड़ न करेगा, मगर पक्की क़सम खाने और उसके खिलाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हारी पकड़ करेगा।" (सूरतुल बक़रा :225)

क़सम का पक्का करना दिल के इरादे और उसके संकल्प से होता है। कहा जाता है : (अ-क़-दा अल्-हब्ला) अर्थात् : रस्सी के एक हिस्से को दूसरे से कस दिया (गांठ लगा हदया)। एतिक़ाद का शब्द "अक्द" से निकला है, जिसका अर्थ बांधने और कसने के होते हैं, कहा जाता है : (ए-तक़द्तो कज़ा), अर्थात् : मैं ने अपने दिल में इसको दृढ़ कर लिया, अत: वह मन के दृढ़ हुक्म का नाम है।

इस्लामी शरीअत में अक़ीदा का अर्थ : वो वैज्ञानिक बातें जिन पर मुसलमान के लिए अपने दिल में आस्था रखना और बिना किसी सन्देह, शंका और संकोच के उन पर पक्का विश्वास रखना अनिवार्य है, क्योंकि अल्लाह तआला ने उसे उन बातों की अपनी किताब (क़ुर्आन) के द्वारा, या अपने पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अपनी वह्य के माध्यम से सूचना दी है।

अक़ाईद की मौलिक बातें जिन पर आस्था रखने का अल्लाह तआला ने हमें आदेश किया है, वो अल्लाह तआला के इस कथन में विर्णत हैं : "रसूल ईमान लाया उस चीज़ पर जो उसके पालनहार की तरफ से उसकी ओर उतारी गयी है और मोमिन लोग भी ईमान लाये, सब अल्लाह पर, उसके फरिश्तों पर, उस की किताबों पर, और उस के पैग़म्बरों (सन्देष्टाओं) पर ईमान लाये, हम उस के पैग़म्बरों में से किसी के बीच अंतर और भेद-भाव नहीं करते, और उन्हों ने कहा कि हम ने सुना और आज्ञा पालन किया, ऐ हमारे पालनहार हम तेरी क्षमा के आकांक्षी हैं, और तेरी ही तरफ पलट कर जाना है।"

तथा पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सुप्रसिद्ध हदीसे-जिब्रील में उन मौलिक बातों को अपने इस फरमान के द्वारा सुनिश्चित किया है :"ईमान : यह है कि तू ईमान लाये (पक्का विश्वास रखे) अल्लाह पर, उस के फरिश्तों पर, उस की किताब पर, उस की मुलाक़ात पर, उस के सन्देष्टाओं पर, तथा तू ईमान लाये मरने के बाद पुन: जीवित करके उठाये जाने पर।"

अत: इस्लाम में अक़ीदा से अभिप्राय : वो वैज्ञानिक बातें और मसाइल हैं जो अल्लाह और उसके रसूल के द्वारा विशुद्ध रूप से प्रमाणित हैं, और जिन पर एक मुसलमान के लिये अल्लाह और उसके रसूल की पुष्टि करते हुये अपने दिल में सुदृढ़ आस्था रखना अनिवार्य है।

स्रोत: शर्ह लुम्अतुल-एतिक़ाद, लेखक: इब्ने उसैमीन, तथा अल-अक़ीदतो फिल्लाह, लेखक: उमर अल-अश्क़र