Mengenai fatwa itu

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2015-05-22
Soalan

क्या मानव अल्लाह के द्वारा प्रतिबंधित है या उसे चयन करने की स्वतंत्रता है?

क्या मानव अल्लाह के द्वारा निर्धारित एक पाठ्यक्रम का प्रतिबद्ध है या उसे चुनाव करने का अधिकार (स्वतंत्रता) है?
Jawapan
Jawapan

सर्व प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

शैख इब्ने उसैमीन (रहिमहुल्लाह) से यही प्रश्न किया गया तो उन्हों ने यह उत्तर दिया :

प्रश्नकर्ता को अपने आप से पूछना चाहिए कि क्या उसे किसी ने यह प्रश्न करने पर मज्बूर किया है? और क्या उसके पास जो गाड़ी है उस के प्रकार को उस ने चयन किया है? इसी तरह के अन्य प्रश्न भी करे और उसे उत्तर का पता चल जायेगा कि वह प्रतिबद्ध है या उसे चयन करने का अधिकार है।

फिर वह अपने आप से पूछे कि क्या वह दुर्घटना ग्रस्त अपनी इच्छा और पसंद से होता है?

क्या वह रोग से पीड़ित अपनी इच्छा से होता है?

क्या वह अपनी इच्छा से मरता है?

इसी के समान वह अन्य प्रश्न भी करे और उसे उत्तर का पता चल जायेगा कि वह प्रतिबद्ध है या उसे चयन करने का अधिकार है।

उत्तर : इस में कोई सन्देह नहीं कि वह कार्य जो एक बुद्धिमान मनुष्य करता है, अपनी इच्छा और पसंद से करता है, अल्लाह के इस फरमान को सुनें : "अब जो चाहे अपने रब के पास (नेक काम कर के) जगह बना ले।" (सूरतुन्नबा :39)

और अल्लाह तआला का यह फरमान : "तुम में से कुछ दुनिया चाहते थे और कुछ आखिरत चाहते थे।" (सूरत आल इम्रान :152)

और अल्लाह तआला का यह फरमान : "और जो आखिरत को चाहे और उसके लिए जैसी कोशिश होनी चाहिए वह करता भी हो और वह ईमान के साथ भी हो, फिर तो यही लोग हैं जिनकी कोशिश का अल्लाह के यहाँ पूरा सम्मान किया जायेगा।" (सूरतुल इस्रा :19)

और अल्लाह तआला का यह फरमान सुनें : "तो उस पर फिद्या है कि चाहे तो रोज़ा रख ले, या चाहे तो सदक़ा दे।" (सूरतुल बक़रा : 196) इस में फिद्या देने वाले को अधिकार दिया गया है कि दोनों में से जो भी फिद्या देना चाहे दे सकता है।

किन्तु अगर बन्दे ने किसी चीज़ की इच्छा की और उसे कर लिया तो हमे ज्ञान हो गया कि अल्लाह तआला ने उस को चाहा है, क्योंकि अल्लाह तआला का फरमान है : "(यह क़ुर्आन सारे संसार वालों के लिए उपदेश है) उसके लिए जो तुम में से सीधे मार्ग पर चलना चाहे। और तुम बिना सारे संसार के पालनहार के चाहे कुछ नहीं चाह सकते।" (सूरतुत्-तक्वीर: 28,29)

अत: अल्लाह तआला की परिपूर्ण रूबूबियत (स्वामित्व और प्रभुत्व) के कारण आसमानों और धरती में कोई भी चीज़ उसकी मशीयत के अधीन ही घटित होती है।

जहाँ तक उन चीज़ों का प्रश्न है जो बन्दे पर या उसके द्वारा उसकी पसंद और अधिकार के बिना घटित होते हैं जैसे कि बीमारी, मृत्यु और दुर्घटनायें, तो ये मात्र तक़्दीर (भाग्य) से होती हैं, इनमें बन्दे का कोई अधिकार (विकल्प) और इच्छा नहीं है।

और अल्लाह तआला ही तौफीक़ देने वाला है।

मज्मूअ फतावा शैख इब्ने उसैमीन भाग-2