Nipa fatiwa na

The :attribute is not a valid date. :

2015-05-22
Ibeere

नास्तिकों के समारोहों में भाग लेना ताकि वे हमारे समारोहों में भाग लें

क्या हमारे लिए इस बात की अनुमति है कि हम ग़ैर मुस्लिमों के समारोहों में भाग लें केवल इसलिए कि हम उन्हें आकर्षित कर सकें कि वे भी हमारे समारोहों में भाग लें ?
Idahun
Idahun

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

यदि ये समारोह नास्तिकों और अनेकेश्वरवादियों के त्योहार हैं तो उन नवीन अविष्कारित (मनगढ़ंत) त्योहारों में उनकी भागीदारी निभाना जाइज़ नहीं है। क्योंकि उसमें भाग लेने में गुनाह और अत्याचार पर सहयोग करना पाया जाता है, इसी प्रकार उनके त्योहारों में उनके साथ भाग लेना काफिरों की समानता और छवि अपनाने के स्वरूपों में से है। हालांकि इस्लामी शरीअत ने उनकी समानता अपनाने से रोका है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सलम ने फरमाया : "जिस व्यक्ति ने किसी क़ौम (ज़ाति) की समानता और छवि अपनायी वह उन्हीं में से है।" इसे अबू दाऊद और अहमद ने रिवायत किया है।

तथा उमर रज़ियल्लाहु अन्हु कहा करते थे : "अल्लाह के दुश्मनों से उनके त्योहारों में दूर रहो।" इसे बैहक़ी ने रिवायत किया है।

यदि यह भाग लेना, उदाहरण के तौर पर, किसी दावत (अवसर) में है और उसमें धार्मिक दृष्टिकोण से कोई निषेध (पाप) जैसे कि महिलाओं और पुरूषों का मिश्रण नहीं घटित होता है, या उसमें अल्लाह तआला की हराम की हुई चीज़ों को नहीं किया जाता है जैसे शराब पीना, या सुअर खाना, या नाच व संगीत इत्यादि नहीं होता है, और यह भागीदारी इन काफिरों से प्रेम या स्नेह का कारण नहीं बनती है तो उनके निमंत्रण को स्वीकार करने में कोई आपत्ति (गुनाह की बात) नहीं है, तथा उसे चाहिए कि उन्हें इस्लाम धर्म के संदेश को पहुँचाने का प्रयास करे। क्योंकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ यहूदियों के निमंत्रण को स्वीकार किया है। और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है।

शैख मुहम्मद बिन सालेह अल मुनज्जिद